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Category: mir-ghazal

अब नहीं सीने में मेरे जा-ए-दाग़

अब नहीं सीने में मेरे जा-ए-दाग़ सोज़-ए-दिल से दाग़ है बाला-ए-दाग़ दिल जला आँखें जलीं जी जल गया इश्क़ ने क्या क्या हमें दिखलाए दाग़…

अब जो इक हसरत-ए-जवानी है

अब जो इक हसरत-ए-जवानी है उम्र-ए-रफ़्ता की ये निशानी है रश्क-ए-यूसुफ़ है आह वक़्त-ए-अज़ीज़ उम्र इक बार-ए-कारवानी है गिर्या हर वक़्त का नहीं बे-हेच दिल…

आए हैं ‘मीर’ काफ़िर हो कर

आए हैं ‘मीर’ काफ़िर हो कर ख़ुदा के घर में पेशानी पर है क़श्क़ा ज़ुन्नार है कमर में नाज़ुक बदन है कितना वो शोख़-चश्म दिलबर…